Könyv सनातन - सभ्यता, संघर्ष और पुनर्जागरण Ajay Dhar Bhardwaj

सनातन - सभ्यता, संघर्ष और पुनर्जागरण

Nyelv: Hindi
Kötés: Puha kötésű
Elérhetőség: Könyvújdonság
Küldés 14. 09. 2026
6 609 Ft
भारत को समझने के लिए केवल उसका वर्तमान देखना पर्याप्त नहीं है। उसके पीछे हजारों वर्षों में विकसित हु...

Információk a könyvről

Nyelv
Hindi
Kötés
Könyv - Puha kötésű
Kiadva
2026
oldal
268
EAN
9798235500792
Enbook ID
53682608
Súly
364
Méretek
152 x 229 x 15

Teljes leírás

भारत को समझने के लिए केवल उसका वर्तमान देखना पर्याप्त नहीं है। उसके पीछे हजारों वर्षों में विकसित हुई एक ऐसी सभ्यतागत यात्रा है, जिसने दर्शन, ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, कला, समाज और आध्यात्मिक चिंतन को अनेक रूपों में प्रभावित किया।


'सनातन: सभ्यता, संघर्ष और पुनर्जागरण' इसी यात्रा को समझने का एक प्रयास है।


यह पुस्तक सनातन को केवल धार्मिक आस्था के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यतागत परंपरा के रूप में देखती है-जिसकी जड़ें प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपराओं में हैं और जिसकी अभिव्यक्ति वेदों, उपनिषदों, रामायण-महाभारत, दर्शन, योग, आयुर्वेद, मंदिरों, तीर्थों, कला, भाषाओं और सामाजिक परंपराओं में दिखाई देती है।


पुस्तक प्राचीन भारत के ज्ञान और वैज्ञानिक उपलब्धियों से लेकर उसके शिक्षा-केंद्रों, व्यापार, नगरों और सांस्कृतिक विस्तार तक की यात्रा करती है। इसके बाद यह मध्यकालीन संघर्षों, आंतरिक सामाजिक चुनौतियों, औपनिवेशिक शासन, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभावों, स्वतंत्रता आंदोलन और विभाजन जैसे कठिन अध्यायों से गुजरती है।


लेकिन यह पुस्तक केवल अतीत पर नहीं रुकती।

अंतिम अध्याय आधुनिक भारत में सनातन के पुनर्जागरण, विश्व मंच पर भारत की सांस्कृतिक भूमिका और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी पर विचार करते हैं।

इस पुस्तक का उद्देश्य न तो अतीत का अंधा महिमामंडन है और न अपनी सभ्यता को कमतर करके देखना। जहाँ प्रमाण उपलब्ध हैं, वहाँ प्रमाणों को महत्व दिया गया है; जहाँ परंपरा, आस्था और इतिहास के बीच अंतर है, वहाँ उस अंतर को स्वीकार करने का प्रयास किया गया है।

यह पुस्तक एक प्रश्न छोड़ती है-

हम सनातन को कितना जानते हैं, कितना समझते हैं और आने वाली पीढ़ी को क्या सौंपेंगे?

क्योंकि सनातन केवल अतीत की विर