Könyv Dhahati Hui Deewar (ढहती हुई दीवार) Acharya Chatursen

Dhahati Hui Deewar (ढहती हुई दीवार)

Nyelv: Hindi
Kötés: Puha kötésű
Elérhetőség: Beszállítói készleten
Küldés 10-18 napon belül
5 844 Ft
आचार्य चतुरसेन शास्त्री हिंदी साहित्य के उन दिग्गज लेखकों में से हैं जिन्होंने इतिहास और समाज के अंत...

Információk a könyvről

Nyelv
Hindi
Kötés
Könyv - Puha kötésű
Kiadva
2026
oldal
170
EAN
9789379382016
ISBN
9379382014
Enbook ID
53190164
Súly
205
Méretek
140 x 216 x 10

Teljes leírás

आचार्य चतुरसेन शास्त्री हिंदी साहित्य के उन दिग्गज लेखकों में से हैं जिन्होंने इतिहास और समाज के अंतर्विरोधों को बहुत गहराई से उकेरा है। उनके उपन्यास 'ढहती हुई दीवार' को उनके सबसे सशक्त सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कार्यों में से एक माना जाता है।
'ढहती हुई दीवार' केवल एक शीर्षक नहीं, बल्कि पुरानी मान्यताओं, जर्जर सामाजिक परंपराओं और टूटते हुए नैतिक मूल्यों का प्रतीक है। यह उपन्यास एक ऐसे समाज का चित्रण करता है जो परिवर्तन की दहलीज पर खड़ा है, जहाँ पुरानी पीढ़ी के आदर्श और नई पीढ़ी की आकांक्षाओं के बीच गहरा संघर्ष है।
प्रमुख विशेषताएँ
• सामाजिक यथार्थः लेखक ने उस समय के मध्यमवर्गीय परिवारों की आंतरिक कलह, आर्थिक दबाव और मर्यादाओं के बोझ को अत्यंत सजीव ढंग से प्रस्तुत किया है।
• मनोवैज्ञानिक गहराईः उपन्यास के पात्र केवल हाड़-मांस के पुतले नहीं हैं, बल्कि वे मानवीय भावनाओं, ईर्ष्या, प्रेम और कुंठाओं के जीते-जागते उदाहरण हैं। चतुरसेन जी ने मानवीय मन की परतों को उघाड़ने में कमाल की कुशलता दिखाई है।
• परिवर्तन का चित्रणः यह कहानी दिखाती है कि कैसे वक्त के थपेड़ों से वे 'दीवारें' (रूढ़ियाँ) बह रही हैं, जिन्हें कभी समाज में स्थिरता का आधार माना जाता था।
आचार्य चतुरसेन की भाषा-शैली तत्सम प्रधान होते हुए भी प्रवाहमयी और मर्मस्पर्शी है। 'ढहती हुई दीवार' हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि प्रगति की दौड़ में हम जो खो रहे हैं और जो पा रहे हैं, उसका मूल्य क्या है। यदि आप सामाजिक संघर्ष और मानवीय स्वभाव के जटिल ताने-बाने को समझना चाहते हैं, तो यह उपन्यास एक अनिवार्य पठनीय कृति है।